सुकून मिलता है दो लफ्ज़

सुकून मिलता है दो लफ्ज़ कागज पे उतार कर,
कह भी देता हूँ और आवाज भी नहीं होती।

रुकावटें तो सिर्फ जिंदा

रुकावटें तो सिर्फ जिंदा इंसान के लिए हैं
मय्यत के लिए तो सब रास्ता छोड देते हैं

अगर आप सही हो तो

अगर आप सही हो तो कुछ सही साबित
करने की कोशिश ना करो
बस सही बने रहो गवाही खुद वक्त देगा

तैरना सीखना है तो

तैरना सीखना है तो पानी में उतरना ही होगा
किनारे बैठ कर कोई गोताखोर नहीं बनता

जीवन एक दर्पण की

जीवन एक दर्पण की तरह है।
यदि आप उस पर मुस्कुराते हैं
तो यह भी आपको मुस्कान देगा

बहुत कुछ बदलता है

बहुत कुछ बदलता है हर रोज,
लेकिन मेरे हौसले नहीं बदलते,
बदलता हूं तरीके जरूर,
लेकिन मेरे इरादे नहीं बदलते|

जहां आप की अहमियत

“जहां आप की अहमियत समझी ना जाए वहां जाना बंद कर दो
चाहे वह किसी का घर हो या किसी का दिल।”

ज्यादा नहीं बस इतने

“ज्यादा नहीं बस इतने साफल हो जाओ की
अपने माता-पिता की हर ख़्वाहिश पूरी कर सको।”

मौन से जो कहा जा

“मौन से जो कहा जा सकता है वो शब्द से नहीं,
और जो दिल से दिया जा सकता है वो हाथ से नहीं।”

कोई भी रिश्ता ना होने

कोई भी रिश्ता ना होने पर भी जो रिश्ता निभाता हैं,
वो रिश्ता एक दिन दिल की गहराइयों को छू जाता हैं..

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