सुकून मिलता है दो लफ्ज़

सुकून मिलता है दो लफ्ज़ कागज पे उतार कर,
कह भी देता हूँ और आवाज भी नहीं होती।

ज्यादा नहीं बस इतने

“ज्यादा नहीं बस इतने साफल हो जाओ की
अपने माता-पिता की हर ख़्वाहिश पूरी कर सको।”

Khamoshiyan Wahi Rahi Ta-Umra Darmiyaan

खामोशियाँ वही रही ता-उम्र दरमियाँ,
बस वक़्त के सितम और हसीन होते गए।

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