Festival Wishes Shayari

श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएं

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समस्त देशवासियों को श्री हनुमान जी के
जन्मोत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएं।

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हनुमान जी के पावन जन्मोत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएँ

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आप सभी को हनुमान जी के पावन जन्मोत्सव
के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ।।

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श्री हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं

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आप सभी को श्री हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

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हनुमान जयंती पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

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हनुमान जयंती के पावन अवसर पर
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

हनुमान जंयती 2020 में कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि

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Hanuman Jayanti 2020 Date And Time : हनुमान जंयती 2020 में कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि, कथा, मंत्र और हनुमान जी की आरती

Hanuman Jayanti 2020 Date And Time : हनुमान जंयती के दिन बजरंग बली की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, पुराणों के अनुसार इन्हें भगवान शिव का 11वां रूद्र अवतार माना जाता है। हनुमान जी के पिता का नाम वनरराज केसरी और माता का नाम अंजना था तो चलिए जानते हैं हनुमान जंयती 2020 में कब है (Hanuman Jayanti 2020 Mai Kab Hai), हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त (Hanuman Jayanti Shubh Muhurat) , हनुमान जयंती का महत्व (Hanuman Jayanti Ka Mahatva), हनुमान जयंती की पूजा विधि (Hanuman Jayanti Puja Vidhi),हनुमान जयंती कथा (Hanuman Jayanti Story), हनुमान जी के मंत्र (Hanuman Ji Ke Mantra) और हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti)

प्रभु श्री राम के भक्त, संकट मोचन, महावीर, बजरंग बलि हनुमान की महिमा सबसे न्यारी हैं। सूरज को निगलना, पर्वत को उठाकर उड़ना, रावण की सोने की लंका को फूंकना कितने ही ऐसे असंभव लगने वाले कार्य हैं जिन्हें श्री हनुमान ने कर दिखाया। माता अंजनी के लाल और पिता पवन के पुत्र वीर हनुमान का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार यह तिथि इस वर्ष 19 अप्रैल को होगी। आइये जानते हैं पवन पुत्र हनुमान के बारे में।

संकट मोचन हनुमान जी की जन्म कथा

हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार माने जाते हैं| उनके जन्म के बारे में पुराणों में जो उल्लेख मिलता है उसके अनुसार अमरत्व की प्राप्ति के लिये जब देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया को उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। तब भगवान विष्णु मोहिनी के भेष अवतरित हुए। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया| जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ|

केसरी नंदन कैसे बने हनुमान

केसरी नंदन मारुती का नाम हनुमान कैसे पड़ा? इससे जुड़ा एक जग प्रसिद्ध किस्सा है| यह घटना हनुमानजी की बाल्यावस्था में घटी| एक दिन मारुती अपनी निद्रा से जागे और उन्हें तीव्र भूख लगी| उन्होंने पास के एक वृक्ष पर लाल पका फल देखा| जिसे खाने के लिए वे निकल पड़े| दरअसल मारुती जिसे लाल पका फल समझ रहे थे वे सूर्यदेव थे| वह अमावस्या का दिन था और राहू सूर्य को ग्रहण लगाने वाले थे। लेकिन वे सूर्य को ग्रहण लगा पाते उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया। राहु कुछ समझ नहीं पाए कि हो क्या रहा है? उन्होनें इंद्र से सहायता मांगी| इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को मुक्त नहीं किया तो, इंद्र ने बज्र से उनके मुख पर प्रहार किया जिससे सूर्यदेव मुक्त हुए| वहीं इस प्रहर से मारुती मूर्छित होकर आकाश से धरती की ओर गिरते हैं| पवनदेव इस घटना से क्रोधित होकर मारुती को अपने साथ ले एक गुफा में अंतर्ध्यान हो जाते हैं| जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवों में त्राहि- त्राहि मच उठती है| इस विनाश को रोकने के लिए सारे देवगण पवनदेव से आग्रह करते हैं कि वे अपने क्रोध को त्याग पृथ्वी पर प्राणवायु का प्रवाह करें| सभी देव मारुती को वरदान स्वरूप कई दिव्य शक्तियाँ प्रदान करते हैं और उन्हें हनुमान नाम से पूजनीय होने का वरदान देते हैं| उस दिन से मारुती का नाम हनुमान पड़ा| इस घटना की व्याख्या तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में की गई है –

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

हनुमान जी की पूजा विधि

1. हनुमान जी की पूजा में ब्रह्मचर्य का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है। इसलिए आपको हनुमान जंयती के एक दिन पहले से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

2. इसके बाद एक चौकी पर गंगाजल छिड़कें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछांए

3.कपड़ा बिछाने के बाद भगवान श्री राम और माता का स्मरण करें और एक चौकी पर भगवान राम, सीता और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें।

4.इसके बाद हनुमान जी के आगे चमेली के तेल का दीपक जलाएं और उन्हें लाल पुष्प, चोला और सिंदूर अर्पित करें।

5. ये सभी चीजें अर्पित करने के बाद , हनुमान चालीसा , हनुमान जी के मंत्र और श्री राम स्तुति का पाठ अवश्य करें।

6. इसके बाद हनुमान जी की विधिवत पूजा करें और यदि संभव हो तो इस दिन रामयाण का पाठ भी अवश्य करें।

7. हनुमान जी की विधिवत पूजा करने के बाद उनकी धूप व दीप से आरती अवश्य उतारें।

8. इसके बाद हनुमान जी की आरती उतारें और उन्हे गुड़ चने और बूंदी के प्रसाद का भोग लगाएं ।

9. भोग लगाने के बाद हनुमान जी से क्षमा याचना अवश्य करें। क्योंकि अक्सर पूजा में जानें अनजाने कोई न कोई भूल हो जाती है।

10.अगर हो सके तो इस दिन बंदरो को गुड़ और चना अवश्य खिलाएं। इस दिन बंदरों को गुड़ और चना खिलाना काफी शुभ माना जाता है।

हनुमान जयंती पर्व तिथि व मुहूर्त 2020

हनुमान जयंती 2020 (8 अप्रैल)

हनुमान जयंती तिथि – बुधवार, 8 अप्रैल 2020

पूर्णिमा तिथि आरंभ – 12:00 (7 अप्रैल 2020)

पूर्णिमा तिथि समाप्त – 08:03 (8 अप्रैल 2020)

हनुमान जी के मंत्र

1.ॐ अं अंगारकाय नमः’

3.ॐ हं हनुमते नम:

4.अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।

2.नोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठ।

5.ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमानलला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांपै।

अंजनिपुत्र महा बलदायी, संतन के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाये।

लंका-सो कोट समुद्र-सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारि असुर संहारे, सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित परे सकारे, आनि संजीवन प्रान उबारे।

पैठि पताल तोरि जम-कारे, अहिरावन की भुजा उखारे।

बाएं भुजा असुरदल मारे, दहिने भुजा सन्तजन तारे।

सुर नर मुनि आरती उतारे, जय जय जय हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई, आरति करत अंजना माई।

जो हनुमानजी की आरति गावै, बसि बैकुण्ठ परम पद पावै।